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नमस्कार! ( Greetings! )

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         नमस्ते या नमस्कार करने की मुद्रा। नमस्ते या नमस्कार , भारतीयों के बीच अभिनन्दन करने का प्रयुक्त शब्द है जिसका अर्थ है तुम्हारे लिए प्रणाम।  Namaste or Namaskar Gesture. Namaste or Namaskar is common among Indians to greet (to welcome as well as to bid farewell) each other (verbally with the gesture or only verbally) and it means I salute the divine in you.  

सामान्य बोलचाल ( Common conversation )

Good = अच्छा achchaa  Bad = बुरा buraa  Friend = मित्र (mitra) (friend neutral gender) यार (yaar) (close friend) दोस्त dost (male friend) सहेली saheli (female friend). [Note: usually दोस्त is used by men to address another man, सहेली is man's girl friend, यार is girl's boy friend.] What is your name? = आपका नाम क्या है? aapka naam kya hai? [This is used to address a persn with respect e.g. an older or unknown person. Similar to  vous  in French or  usted  in Spanish.] तुम्हारा नाम क्या है? Tumhara naam kya hai [This is used to address a younger person or a close friend. Similar to  Tu  in French and Spanish.] Nice to meet you. = आपसे मिलकर खुशी हुई aapse milkar khushii huyii Birthday = जन्मदिन janmadin [जन्म (Janma means birth; din means day ) Happy Birthday! = जन्मदिन मुबारक हो । janmadin mubaarak ho OR जन्मदिन की शुभकामनाएँ! janmadin ki shubhkaamnaayehn Tomorrow/Yesterday = कल kal (Hindi does not have seperate words for yesterday and tomorrow, the meaning is determined

औपचारिक बातचीत ( Formal conversation )

You are welcome [as in welcome to our home] = आपका स्वागत है। (aapkaa svaagat hai) Hello = नमस्ते (namasté) How are you? = आप कैसे हैं? (aap kaisé hain?) [ hai  is pronounced nasally like in "hand"] Goodbye = अलविदा (alvida) (also नमस्ते,  namaste ) (also फिर मिलेंगे  phir milenge  and the reply is ज़रूर मिलेंगे  zaroor milenge ) Thank you = धन्यवाद dhanyavaad or शुक्रिया shukriya Thank you very much = आपका बहुत बहुत धन्यवाद (aapkaa bahut bahut dhanyavaad) Please = कृपया (kripyaa [most people just say please or add  zara  into the sentence]) Excuse me = क्षमा/माफ़ करें kshamaa/maaf karén (क्षमा and माफ़ are synonyms) Good = अच्छा achchhaa

भारतीय संस्कृति ( Indian culture )

विश्व में अनेक संस्कृतियाँ पनपी और मिट गई। आज उनका कहीं नामोंनिशान तक नहीं है, सिर्फ उनकी स्मृति बाकी है, लेकिन भारतीय संस्कृति में है ऐसा कुछ कि वह कुछ नहीं मिटा। उसे मिटाने के बहुत प्रयास हुए और यह सिलसिला आज भी जारी है, पर कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी। भारतीय संस्कृति में आखिर क्या है, जो उसे हमेशा बचाए रखता है, जिसकी वजह से वह हजारों साल से विदेशी हमलावरों से लोहा लेती रही और इन दिनों इन पर जो हमले हो रहे हैं, उसका मुकाबला कर रही है ? आखिर कैसा है वह भारतीय संस्कृति का वह तंत्र, जिसे हमलावार संस्कृतियाँ छिन्न-भिन्न नहीं कर पातीं ? हर बार उन्हें लगता है कि इस बार वे इसे अवश्य पदाक्रांत कर लेंगी, पर हुआ हमेशा उलटा है, वे खुद ही पदाक्रांत होकर भारतीय संस्कृति में विलीन हो गईं, क्यों और कैसे ? हजारों साल तक क्यों और कैसे जीवित है भारतीय संस्कृति; क्या हैं इसके मूल तत्व, जो इसे नष्ट होने से हमेशा बचाते और विरोधी संस्कृतियों का मुकाबला करने की शक्ति देते रहे है; किन-किन संस्कृतियों ने कब-कब और किस-किस रूप में भारतीय संस्कृति पर हमले किये और कैसे तथा किस रूप में वे पराजित हुई; भ

महान हिंदी रचनाकार ( Great Hindi authors )

".... खड़ीबोली दो विभिन्न रूपों में सारे प्रान्तों में बोली जाती है । जब उसमें फारसी शब्दों का प्रचुर प्रयोग किया जाता है और वह फारसी लिपि में लिखी जाती है तो वह उर्दू कहलाती है , जब वह बाह्य मिश्रण से अछूती  होती है और नागरी लिपि में लिखी जाती है , तब वह हिंदी कहलाती है। -- --   भारतेंदु हरिश्चन्द्र महावीर प्रसाद द्विवेदी द्विवेदी जी सरल और सुबोध भाषा लिखने के पक्षपाती थे। उन्होंने स्वयं सरल और प्रचलित भाषा को अपनाया। उनकी भाषा में न तो संस्कृत के तत्सम शब्दों की अधिकता है और न उर्दू-फारसी के अप्रचलित शब्दों की भरमार है । द्विवेदी जी ने अपनी भाषा में उर्दू और फारसी के शब्दों का निस्संकोच प्रयोग किया ,  किंतु इस प्रयोग में उन्होंने केवल प्रचलित शब्दों को ही अपनाया।   प्रेमचन्द प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए थे और हिन्दी के महान लेखक बने। हिन्दी को अपना खास मुहावरा ऑर खुलापन दिया। कहानी और उपन्यास दोनो में युगान्तरकारी परिवर्तन पैदा किए। उन्होने साहित्य में सामयिकता प्रबल आग्रह स्थापित किया। महादेवी वर्मा महादेवी वर्मा का विचार है कि अंधकार से सूर्य

साहस / निर्भीकता / पराक्रम/ आत्म्विश्वास / प्रयत्न

साहस / निर्भीकता / पराक्रम/ आत्म्विश्वास / प्रयत्न कबिरा मन निर्मल भया , जैसे गंगा नीर । पीछे-पीछे हरि फिरै , कहत कबीर कबीर ॥ — कबीर साहसे खलु श्री वसति । ( साहस में ही लक्ष्मी रहती हैं ) इस बात पर संदेह नहीं करना चाहिये कि विचारवान और उत्साही व्यक्तियों का एक छोटा सा समूह इस संसार को बदल सकता है । वास्तव मे इस संसार को इसने (छोटे से समूह) ही बदला है । जरूरी नही है कि कोई साहस लेकर जन्मा हो , लेकिन हरेक शक्ति लेकर जन्मता है । बिना साहस के हम कोई दूसरा गुण भी अनवरत धारण नहीं कर सकते । हम कृपालु, दयालु , सत्यवादी , उदार या इमानदार नहीं बन सकते । बिना निराश हुए ही हार को सह लेना पृथ्वी पर साहस की सबसे बडी परीक्षा है । — आर. जी. इंगरसोल जिस काम को करने में डर लगता है उसको करने का नाम ही साहस है । मुट्ठीभर संकल्पवान लोग, जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं। - महात्मा गांधी किसी की करुणा व पीड़ा को देख कर मोम की तरह दर्याद्र हो पिघलनेवाला ह्रदय तो रखो परंतु विपत्ति की आंच आने पर कष्टों-प्रतिकूलताओं के थपेड़े खाते रहने की स्थिति में चट्टान की तरह दृढ़ व ठो

साहित्य

साहित्य साहित्य समाज का दर्पण होता है । साहित्यसंगीतकला विहीन: साक्षात् पशुः पुच्छविषाणहीनः । ( साहित्य संगीत और कला से हीन पुरूष साक्षात् पशु ही है जिसके पूँछ और् सींग नहीं हैं । ) — भर्तृहरि सच्चे साहित्य का निर्माण एकांत चिंतन और एकान्त साधना में होता है | –अनंत गोपाल शेवड़े साहित्य का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं है , परंतु एक नया वातावरण देना भी है । — डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन

भाषा / स्वभाषा

भाषा / स्वभाषा निज भाषा उन्नति अहै, सब भाषा को मूल । बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिय को शूल ॥ — भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जो एक विदेशी भाषा नहीं जानता , वह अपनी भाषा की बारे में कुछ नही जानता । — गोथे भाषा हमारे सोचने के तरीके को स्वरूप प्रदान करती है और निर्धारित करती है कि हम क्या-क्या सोच सकते हैं । — बेन्जामिन होर्फ शब्द विचारों के वाहक हैं । शब्द पाकर दिमाग उडने लगता है । मेरी भाषा की सीमा , मेरी अपनी दुनिया की सीमा भी है। - लुडविग विटगेंस्टाइन आर्थिक युद्ध का एक सूत्र है कि किसी राष्ट्र को नष्ट करने के का सुनिश्चित तरीका है , उसकी मुद्रा को खोटा कर देना । (और) यह भी उतना ही सत्य है कि किसी राष्ट्र की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का सुनिश्चित तरीका है, उसकी भाषा को हीन बना देना । ..(लेकिन) यदि विचार भाषा को भ्रष्ट करते है तो भाषा भी विचारों को भ्रष्ट कर सकती है । — जार्ज ओर्वेल शिकायत करने की अपनी गहरी आवश्यकता को संतुष्ट करने के लिए ही मनुष्य ने भाषा ईजाद की है. -– लिली टॉमलिन श्रीकृष्ण ऐसी बात बोले जिसके शब्द और अर्थ परस्पर नपे-तुले रहे और इसके बाद चुप हो गए। वस्तुतः बड

महात्मा गाँधी के सुविचार

महात्मा गाँधी वे ईसाई हैं, इससे क्या हिन्दुस्तानी नहीं रहे ? और परदेशी बन गये ? कितने ही नवयुवक शुरु में निर्दोष होते हुए भी झूठी शरम के कारण बुराई में फँस जाते होगे । उस आस्था का कोई मूल्य नहीं जिसे आचरण में न लाया जा सके। महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ १८० अहिंसा एक विज्ञान है। विज्ञान के शब्दकोश में 'असफलता' का कोई स्थान नहीं। महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ ८१ सार्थक कला रचनाकार की प्रसन्नता, समाधान और पवित्रता की गवाह होती है। महात्मा, भाग २ के पृष्ठ ५६ एक सच्चे कलाकार के लिए सिर्फ वही चेहरा सुंदर होता है जो बाहरी दिखावे से परे, आत्मा की सुंदरता से चमकता है। महात्मा, भाग २ के पृष्ठ १५९ मनुष्य अक्सर सत्य का सौंदर्य देखने में असफल रहता है, सामान्य व्यक्ति इससे दूर भागता है और इसमें निहित सौंदर्य के प्रति अंधा बना रहता है। महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ १८० चरित्र और शैक्षणिक सुविधाएँ ही वह पूँजी है जो मातापिता अपने संतान में समान रूप से स्थानांतरित कर सकते हैं। महात्मा, भाग २ के पृष्ठ ३६७ विश्व के सारे महान धर्म मानवजाति की समानता, भाईचारे और सहिष्णुता का संदेश देते हैं। महात्मा, भाग ३ के पृष्ठ

सुभाषित / सूक्ति / उद्धरण / सुविचार / अनमोल वचन

सुभाषित / सूक्ति / उद्धरण / सुविचार / अनमोल वचन पृथ्वी पर तीन रत्न हैं - जल, अन्न और सुभाषित । लेकिन मूर्ख लोग पत्थर के टुकडों को ही रत्न कहते रहते हैं । — संस्कृत सुभाषित विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड संसार रूपी कटु-वृक्ष के केवल दो फल ही अमृत के समान हैं ; पहला, सुभाषितों का रसास्वाद और दूसरा, अच्छे लोगों की संगति । — चाणक्य सही मायने में बुद्धिपूर्ण विचार हजारों दिमागों में आते रहे हैं । लेकिन उनको अपना बनाने के लिये हमको ही उन पर गहराई से तब तक विचार करना चाहिये जब तक कि वे हमारी अनुभूति में जड न जमा लें । — गोथे मैं उक्तियों से घृणा करता हूँ । वह कहो जो तुम जानते हो । — इमर्सन किसी कम पढे व्यक्ति द्वारा सुभाषित पढना उत्तम होगा। — सर विंस्टन चर्चिल बुद्धिमानो की बुद्धिमता और बरसों का अनुभव सुभाषितों में संग्रह किया जा सकता है। — आईजक दिसराली — मैं अक्सर खुद को उदृत करता हुँ। इससे मेरे भाषण मसालेदार हो जाते हैं। सुभाषितों की पुस्तक कभी पूरी नही हो सकती। — राबर्ट हेमिल्टन